क्या बाइबिल मुहम्मद की ख़ुशख़बरी देती है ?

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वह नुस्ख़े जिन्हें मुसलमान क़बूल करते हैं : अहमद की ख़ुशख़बरी (क़ुरआन 61:6), मूसा जैसा पैग़ंबर (व्यवस्थाविवरण 18:18), यूहन्ना का पैराक्लीट, और उन्हीं नुस्ख़ों की ईसाई पढ़ाइयाँ।

इस्लाम सिखाता है कि हाँ : क़ुरआन सुनाता है कि ईसा ने "एक रसूल की शुभ सूचना देने वाला हूँ, जो मेरे बाद आएगा, जिसका नाम अहमद है" की ख़ुशख़बरी दी (क़ुरआन 61:6), और बयान करता है कि मुहम्मद (उन पर अल्लाह की रहमत और सलामत हो) तौरात और इंजील में "लिखा हुआ" है (क़ुरआन 7:157)। मुसलमान इस तरह व्यवस्थाविवरण 18:18 (इसराइलियों के भाइयों में से "मूसा जैसा" पैग़ंबर) और यूहन्ना 14-16 के पैराक्लीट को मुहम्मद की ख़ुशख़बरी पढ़ते हैं ; ईसाई उन्हें ईसा और रूहुल-क़ुद्स पर लागू करते हैं।

यह पृष्ठ दोनों पढ़ाइयाँ, नुस्ख़े हाथ में, पेश करता है।

18 अक्टूबर 2026 को 20h58 बजे अपडेट किया गया

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क़ुरआन के मुताबिक़ मुहम्मद की ख़ुशख़बरी

मुसलमानों की बुनियाद क़ुरआनी है, तफ़सीरी नहीं : ईसा (अलैहिस्सलाम) ख़ुद ने उसकी ख़ुशख़बरी दी जो उनके बाद आने थे।

"तथा याद करो जब मरयम के पुत्र ईसा ने कहा : ऐ इसराईल की संतान! निःसंदेह मैं तुम्हारी ओर अल्लाह का रसूल हूँ, उस तौरात की पुष्टि करने वाला हूँ, जो मुझसे पहले आई है तथा एक रसूल की शुभ सूचना देने वाला हूँ, जो मेरे बाद आएगा, जिसका नाम अहमद है।" (क़ुरआन 61:6)। क़ुरआन यह भी बयान करता है कि मुहम्मद (उन पर सलाम हो) पिछली किताबों में मन्सूब हैं : "जो लोग उस रसूल का अनुसरण करते हैं, जो उम्मी नबी है, जिसे वे अपने पास तौरात तथा इंजील में लिखा हुआ पाते हैं" (क़ुरआन 7:157)।

मुसलमानों के लिए बची ख़ातिर यह कि यह ख़ुशख़बरियाँ नुस्ख़ों में कहाँ मिलती हैं, और दो उम्मीदवार सबसे आगे हैं : व्यवस्थाविवरण 18:18 और यूहन्ना की इंजील का पैराक्लीट।

"मूसा जैसा" पैग़ंबर (व्यवस्थाविवरण 18:18)

अल्लाह वहाँ मूसा (अलैहिस्सलाम) से वादा करता है : "मैं उनके भाइयों में से तुम्हारे जैसा इक पैग़ंबर पैदा करूँगा और मैं अपनी बातें उसके मुँह में डालूँगा" (व्यवस्थाविवरण 18:18)।

इस्लामी हुज्जत : "उनके भाई" इसराइलियों के क़राबती क़ौमों को कहते हैं, यानी इस्माइलियों को, और "तुम्हारे जैसा" ईसा पर लागू नहीं होता, जो मूसा से गहरी हद तक मुख़्तलिफ़ हैं (मुज़ज़ब पैदाइश, बिना मदनी क़ानून, बिना सल्तनत), जबकि मुहम्मद बड़े नुक़्तों पर मूसा से मिलते हैं : बाप-माँ, निकाह, ज़ालिम से फ़रार, नया क़ानून, सियासी सल्तनत, तबीअती मौत।

ग़ौर-तलब बात : यूहन्ना 1:19-21 में पादरी यूहन्ना बपतिस्मा देने वाले से पूछते हैं : "क्या तुम मसीह हो ? (...) क्या तुम इलिय्याह हो ? (...) क्या तुम वह पैग़ंबर हो ?" : यह सवाल तीन हस्तियाँ जुदा करता है, जिनमें मुंतज़िर "पैग़ंबर" भी है, मसीह से अलग, जिसे ईसाई पढ़ाई हस्तियों को इक करके हल करती है, और इस्लामी पढ़ाई तीसरे पैग़ंबर के इंतज़ार को देखती है।

सीनै, सेइर, पारान : व्यवस्थाविवरण के तीन पहाड़

व्यवस्थाविवरण 33:2 की आयत इब्नुल क़य्यिम की हिदायत अल-हयारा में मनपसंद हुज्जतों में से इक है : "रब सीनै से आया, सेइर से उठा, पारान के पहाड़ से चमका" (बाइबिल दु रब्बिनात, व्यवस्थाविवरण 33:2)।

इब्न क़ुतैबा को दोहराते हुए वह वहाँ वक़्त की तरतीब में तीन इल्हाम पढ़ते हैं : सीनै, यानी मूसा को दी गई तौरात ; सेइर, बेतलहम का इलाक़ा जहाँ ईसा पैदा हुए, यानी इंजील ; और पारान, जिसके मक्के के पहाड़ों होने पर कोई बहस नहीं, जहाँ इबराहीम (अलैहिस्सलाम) ने हाजिरा और इस्माईल (अलैहिस्सलाम) को बसाया (उत्पत्ति 21:21), यानी मुहम्मद को दिया गया क़ुरआन।

नुस्ख़ा ख़ुद कालक्रमी तरतीब देती है, इब्नुल क़य्यिम नोट करते हैं : तौरात "आई और उभरी" जैसे उभरता सवेरा, इंजील "उठा" जैसे रोशनी फैलाता सूरज, और क़ुरआन "चमका" जैसे नम्बर-ए-अरूज का सूरज, और क़ुरआन पैग़ंबर को इसी नूर की मिसाल देता है : "एक प्रकाशमान दीप (बनाकर भेजा है)" (क़ुरआन 33:46)।

और सूरह अत-तीन वही तीन मुक़द्दस जगहें इक साथ लाती है : अंजीर और ज़ैतून (यरूशलम, ईसा), तूरे सीनीन (मूसा (अलैहिस्सलाम)), और "इस शान्ति वाले नगर" (मक्का, मुहम्मद) (क़ुरआन 95:1-3)। यह हुज्जत इस वजह से मज़बूत है कि वह उस नुस्ख़े से शुरू होती है जिसे यहूद और ईसाई दोनों क़बूल करते हैं, और उसमें तीसरे इल्हाम की ख़ुशख़बरी पढ़ती है।

यूहन्ना का पैराक्लीट : मुहम्मद की ख़ुशख़बरी

ईसा वादा करते हैं : "मैं बाप से दुआ करूँगा और वह तुम्हें एक और तसल्ली देने वाला (पराक्लीतोस) अता करेगा, ताकि वह हमेशा के लिए तुम्हारे साथ रहे" (यूहन्ना 14:16), और : "जब वह आएगा, तसल्ली देने वाला, हक़ की रूह, वह तुम्हें हर हक़ की तरफ़ राह दिखाएगा ; क्योंकि वह अपने आप से कुछ नहीं कहेगा, बल्कि जो सुनेगा सब कहेगा" (यूहन्ना 16:13)। ईसाई पढ़ाई : यह पेंटेकोस्ट में आने वाला रूहुल-क़ुद्स है।

इस्लामी पढ़ाई : "एक और तसल्ली देने वाला" ईसा जैसी हस्ती है, यानी इक इंसान।

वह "अपने आप से कुछ नहीं कहेगा" बल्कि सुना हुआ पहुँचाएगा : बज़बत वही तअरीफ़ जो क़ुरआन वही पाने वाले पैग़ंबर की करता है ; और वह "हर हक़ की तरफ़ राह दिखाएगा", यानी मुकम्ल इल्हाम लाएगा। पुराने मुसलमान मुअल्लिफ़ीन, जैसे अपनी सीरत में इब्न इशाक़, इस पैराक्लीट को मुहम्मद बताते हैं। लक़्सिमी (लुग़ती) हुज्जत (पराक्लीतोस का पेरिक्लीतोस, "तारीफ़-शुदा", यानी अहमद, से क़रीबत) दलील-मंद रिवायत में मौजूद है मगर दर्जा दूसरा रखती है और बहस-ख़ीज़ है : मुसलमान के लिए फ़ैसलकुन ख़ुशख़बरी क़ुरआन 61:6 ही है।

बाइबिल में मुहम्मद : बाक़ी क़बूल किए गए नुस्ख़े

इस दस्तावेज़ का तौरात वाला हिस्सा उसका मुख़्तस्स पृष्ठ, तफ़सील आयतों के साथ, रखता है : तौरात में मुहम्मद।

  • इस्माईल की दुआ : "मैं उसे इक बड़ी क़ौम बनाऊँगा" (उत्पत्ति 21:13, 21:18) : इस्माईल, अरबों के बाप-दादा, की नस्ल भी इलाही वादा रखती है।
  • यशायाह 42 : अल्लाह का वह बंदा जो "इंसाफ़ की ख़ुशख़बरी देता है", जिसकी तारीफ़ "केदार" तक पहुँचती है, इस्माईल की औलाद का शहर (यशायाह 42:11), इस्लामी पढ़ाई के मुताबिक़ हिजाज़ का इलाक़ा।

बाइबिल में मुहम्मद : नतीजा कैसे निकालें ?

हर रिवायत अपनी पढ़ाई से नुस्ख़े पढ़ती है : ईसाई बाइबिल को अपनी मजालिस से पढ़ता है, मुसलमान क़ुरआन से, जो ख़ुशख़बरी बयान करता है और मुवादे का नाम लेता है। मअनी पर इख़्तिलाफ़ इज़्ज़त-मंद बहस से नहीं रोकता (क़ुरआन 29:46), न क़ुरआन का यह मुश्तरका कलिमा पेश करने से : "आओ एक ऐसी बात की ओर जो हमारे बीच और तुम्हारे बीच समान (बराबर) है; यह कि हम अल्लाह के सिवा किसी की इबादत न करें और उसके साथ किसी चीज़ को साझी न बनाएँ" (क़ुरआन 3:64)।

बार-बार पूछे जाने वाले प्रश्न बाइबिल में मुहम्मद

ईसाई बाइबिल में मुहम्मद (उन पर सलाम हो) को क्यों नहीं देखते ?

क्योंकि उनकी पढ़ाई मसीह-मरकज़ है : पुराने अहदनामे का हर वादा, उनके चर्चों के मुताबिक़, ईसा में पूरा होता है। मुसलमान क़ुरआन से शुरू करता है, जो पिछली किताबों में मुहम्मद (उन पर सलाम हो) की ख़ुशख़बरी बयान करता है (क़ुरआन 7:157)। एक ही नुस्ख़ों पर दो पढ़ाइयाँ लागू होती हैं।

"पैराक्लीट" का लफ़्ज़ "पेरिक्लीतोस" (तारीफ़-शुदा) से आता है ?

यह मुसलमानों की पुरानी दलील-मंद हुज्जत है (यूनानी पराक्लीतोस, तसल्ली देने वाला, पेरिक्लीतोस, तारीफ़-शुदा, जो अहमद का तर्जुमा है, के क़रीब माना जाता है)। लुग़वी तौर पर इस पर बहस है और यह बुनियादी हुज्जतों में नहीं : क़ुरआन ख़ुशख़बरी को यूनानी लुग़त पर नहीं, बल्कि क़ुरआन 61:6 के सीधे एलान पर टिकाता है।

क्या मूसा (अलैहिस्सलाम) और मुहम्मद (उन पर सलाम हो) की ज़िंदगियाँ सचमुच हम-क़दम हैं ?

यह क्लासिकी इस्लामी हुज्जत है : दोनों बाप के साथ पैदा हुए, निकाह किया, ज़ालिम से हिजरत की, नया शरीयत लाए, सियासी और फ़ौजी सरदार रहे, तबीअती मौत मरे, और उनकी क़ौम ने उनकी इताअत की। इंजीलों के मुताबिक़ ईसा इन नुक़्तों पर मूसा (अलैहिस्सलाम) से तक़रीबन हर जगह मुख़्तलिफ़ हैं : मुज़ज़ब पैदाइश, कोई मदनी क़ानून नहीं, कोई क़ायम-शुदा जायज़ बादशाह नहीं।

स्रोत: क़ुरआन 61:6 · क़ुरआन 7:157 · बाइबिल : व्यवस्थाविवरण 18:18 ; यूहन्ना 1:19-21 ; यूहन्ना 14:16 ; यूहन्ना 16:13 ; उत्पत्ति 21:13-18 ; यशायाह 42:11 · इब्नुल क़य्यिम, हिदायत अल-हयारा (व्यवस्थाविवरण 33:2)

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निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

पैग़ंबर पर दुरूद