क़ुरआन का रुकू 520 पढ़ें

रुकू 520 सूरह An-Naziat (आयत 1 से 26) से है। इसमें 26 आयतें हैं और यह जुज़ 30 में है।

28 अक्टूबर 2026 को 00h24 बजे अपडेट किया गया

क़ुरआन में रुकू 520

26
आयतें
1
सूरह
30
जुज़
v.1 – v.26
आयतें

रुकू 520 में सूरह

النازعات · जुज़ 30
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سورة النازعات
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हिज़्ब 59 14.5% (40/276)

وَٱلنَّـٰزِعَـٰتِ غَرْقًۭا ﴿1﴾

उन (फ़रिश्तों) की क़सम

وَٱلنَّـٰشِطَـٰتِ نَشْطًۭا ﴿2﴾

जो (कुफ्फ़ार की रूह) डूब कर सख्ती से खींच लेते हैं

وَٱلسَّـٰبِحَـٰتِ سَبْحًۭا ﴿3﴾

और उनकी क़सम जो (मोमिनीन की जान) आसानी से खोल देते हैं

فَٱلسَّـٰبِقَـٰتِ سَبْقًۭا ﴿4﴾

और उनकी क़सम जो (आसमान ज़मीन के दरमियान) पैरते फिरते हैं

فَٱلْمُدَبِّرَٰتِ أَمْرًۭا ﴿5﴾

फिर एक के आगे बढ़ते हैं

يَوْمَ تَرْجُفُ ٱلرَّاجِفَةُ ﴿6﴾

फिर (दुनिया के) इन्तज़ाम करते हैं (उनकी क़सम) कि क़यामत हो कर रहेगी

تَتْبَعُهَا ٱلرَّادِفَةُ ﴿7﴾

जिस दिन ज़मीन को भूचाल आएगा फिर उसके पीछे और ज़लज़ला आएगा

قُلُوبٌۭ يَوْمَئِذٍۢ وَاجِفَةٌ ﴿8﴾

उस दिन दिलों को धड़कन होगी

أَبْصَـٰرُهَا خَـٰشِعَةٌۭ ﴿9﴾

उनकी ऑंखें (निदामत से) झुकी हुई होंगी

يَقُولُونَ أَءِنَّا لَمَرْدُودُونَ فِى ٱلْحَافِرَةِ ﴿10﴾

कुफ्फ़ार कहते हैं कि क्या हम उलटे पाँव (ज़िन्दगी की तरफ़) फिर लौटेंगे

أَءِذَا كُنَّا عِظَـٰمًۭا نَّخِرَةًۭ ﴿11﴾

क्या जब हम खोखल हड्डियाँ हो जाएँगे

قَالُوا۟ تِلْكَ إِذًۭا كَرَّةٌ خَاسِرَةٌۭ ﴿12﴾

कहते हैं कि ये लौटना तो बड़ा नुक़सान देह है

فَإِنَّمَا هِىَ زَجْرَةٌۭ وَٰحِدَةٌۭ ﴿13﴾

वह (क़यामत) तो (गोया) बस एक सख्त चीख़ होगी

فَإِذَا هُم بِٱلسَّاهِرَةِ ﴿14﴾

और लोग शक़ बारगी एक मैदान (हश्र) में मौजूद होंगे

هَلْ أَتَىٰكَ حَدِيثُ مُوسَىٰٓ ﴿15﴾

(ऐ रसूल) क्या तुम्हारे पास मूसा का किस्सा भी पहुँचा है

إِذْ نَادَىٰهُ رَبُّهُۥ بِٱلْوَادِ ٱلْمُقَدَّسِ طُوًى ﴿16﴾

जब उनको परवरदिगार ने तूवा के मैदान में पुकारा

ٱذْهَبْ إِلَىٰ فِرْعَوْنَ إِنَّهُۥ طَغَىٰ ﴿17﴾

कि फिरऔन के पास जाओ वह सरकश हो गया है

فَقُلْ هَل لَّكَ إِلَىٰٓ أَن تَزَكَّىٰ ﴿18﴾

(और उससे) कहो कि क्या तेरी ख्वाहिश है कि (कुफ्र से) पाक हो जाए

وَأَهْدِيَكَ إِلَىٰ رَبِّكَ فَتَخْشَىٰ ﴿19﴾

और मैं तुझे तेरे परवरदिगार की राह बता दूँ तो तुझको ख़ौफ (पैदा) हो

فَأَرَىٰهُ ٱلْـَٔايَةَ ٱلْكُبْرَىٰ ﴿20﴾

ग़रज़ मूसा ने उसे (असा का बड़ा) मौजिज़ा दिखाया

فَكَذَّبَ وَعَصَىٰ ﴿21﴾

तो उसने झुठला दिया और न माना

ثُمَّ أَدْبَرَ يَسْعَىٰ ﴿22﴾

फिर पीठ फेर कर (ख़िलाफ़ की) तदबीर करने लगा

فَحَشَرَ فَنَادَىٰ ﴿23﴾

फिर (लोगों को) जमा किया और बुलन्द आवाज़ से चिल्लाया

فَقَالَ أَنَا۠ رَبُّكُمُ ٱلْأَعْلَىٰ ﴿24﴾

तो कहने लगा मैं तुम लोगों का सबसे बड़ा परवरदिगार हूँ

فَأَخَذَهُ ٱللَّهُ نَكَالَ ٱلْـَٔاخِرَةِ وَٱلْأُولَىٰٓ ﴿25﴾

तो ख़ुदा ने उसे दुनिया और आख़ेरत (दोनों) के अज़ाब में गिरफ्तार किया

إِنَّ فِى ذَٰلِكَ لَعِبْرَةًۭ لِّمَن يَخْشَىٰٓ ﴿26﴾

बेशक जो शख़्श (ख़ुदा से) डरे उसके लिए इस (किस्से) में इबरत है

بسم الله الرحمن الرحيم शुक्र 18 जुमादा अल-अव्वल
الجمعة 18 جمادى الأولى
أحدب متناقص घटता हुआ कूबड़ दिन 19.4 / 29.5
रोशनी 77%
10 दिनों में अमावस्या
حسبنا الله ونعم الوكيل अल्लाह हमारे लिए काफी है, कितना अच्छा रक्षक है

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

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