रुकू 320 सूरह Ash-Shuara (आयत 70 से 104) से है। इसमें 35 आयतें हैं और यह जुज़ 19 में है।
05 अगस्त 2026 को 16h34 बजे अपडेट किया गया
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إِذْ قَالَ لِأَبِيهِ وَقَوْمِهِۦ مَا تَعْبُدُونَ ﴿70﴾
जब उन्होंने अपने (मुँह बोले) बाप और अपनी क़ौम से कहा
قَالُوا۟ نَعْبُدُ أَصْنَامًۭا فَنَظَلُّ لَهَا عَـٰكِفِينَ ﴿71﴾
कि तुम लोग किसकी इबादत करते हो तो वह बोले हम बुतों की इबादत करते हैं और उन्हीं के मुजाविर बन जाते हैं
قَالَ هَلْ يَسْمَعُونَكُمْ إِذْ تَدْعُونَ ﴿72﴾
इबराहीम ने कहा भला जब तुम लोग उन्हें पुकारते हो तो वह तुम्हारी कुछ सुनते हैं
أَوْ يَنفَعُونَكُمْ أَوْ يَضُرُّونَ ﴿73﴾
या तम्हें कुछ नफा या नुक़सान पहुँचा सकते हैं
قَالُوا۟ بَلْ وَجَدْنَآ ءَابَآءَنَا كَذَٰلِكَ يَفْعَلُونَ ﴿74﴾
कहने लगे (कि ये सब तो कुछ नहीं) बल्कि हमने अपने बाप दादाओं को ऐसा ही करते पाया है
قَالَ أَفَرَءَيْتُم مَّا كُنتُمْ تَعْبُدُونَ ﴿75﴾
इबराहीम ने कहा क्या तुमने देखा भी कि जिन चीज़ों कीे तुम परसतिश करते हो
أَنتُمْ وَءَابَآؤُكُمُ ٱلْأَقْدَمُونَ ﴿76﴾
या तुम्हारे अगले बाप दादा (करते थे) ये सब मेरे यक़ीनी दुश्मन हैं
فَإِنَّهُمْ عَدُوٌّۭ لِّىٓ إِلَّا رَبَّ ٱلْعَـٰلَمِينَ ﴿77﴾
मगर सारे जहाँ का पालने वाला जिसने मुझे पैदा किया (वही मेरा दोस्त है)
ٱلَّذِى خَلَقَنِى فَهُوَ يَهْدِينِ ﴿78﴾
फिर वही मेरी हिदायत करता है
وَٱلَّذِى هُوَ يُطْعِمُنِى وَيَسْقِينِ ﴿79﴾
और वह शख्स जो मुझे (खाना) खिलाता है और मुझे (पानी) पिलाता है
وَإِذَا مَرِضْتُ فَهُوَ يَشْفِينِ ﴿80﴾
और जब बीमार पड़ता हूँ तो वही मुझे शिफा इनायत फरमाता है
وَٱلَّذِى يُمِيتُنِى ثُمَّ يُحْيِينِ ﴿81﴾
और वह वही हेै जो मुझे मार डालेगा और उसके बाद (फिर) मुझे ज़िन्दा करेगा
وَٱلَّذِىٓ أَطْمَعُ أَن يَغْفِرَ لِى خَطِيٓـَٔتِى يَوْمَ ٱلدِّينِ ﴿82﴾
और वह वही है जिससे मै उम्मीद रखता हूँ कि क़यामत के दिन मेरी ख़ताओं को बख्श देगा
رَبِّ هَبْ لِى حُكْمًۭا وَأَلْحِقْنِى بِٱلصَّـٰلِحِينَ ﴿83﴾
परवरदिगार मुझे इल्म व फहम अता फरमा और मुझे नेकों के साथ शामिल कर
وَٱجْعَل لِّى لِسَانَ صِدْقٍۢ فِى ٱلْـَٔاخِرِينَ ﴿84﴾
और आइन्दा आने वाली नस्लों में मेरा ज़िक्रे ख़ैर क़ायम रख
وَٱجْعَلْنِى مِن وَرَثَةِ جَنَّةِ ٱلنَّعِيمِ ﴿85﴾
और मुझे भी नेअमत के बाग़ (बेहश्त) के वारिसों में से बना
وَٱغْفِرْ لِأَبِىٓ إِنَّهُۥ كَانَ مِنَ ٱلضَّآلِّينَ ﴿86﴾
और मेरे (मुँह बोले) बाप (चचा आज़र) को बख्श दे क्योंकि वह गुमराहों में से है
وَلَا تُخْزِنِى يَوْمَ يُبْعَثُونَ ﴿87﴾
और जिस दिन लोग क़ब्रों से उठाए जाएँगें मुझे रुसवा न करना
يَوْمَ لَا يَنفَعُ مَالٌۭ وَلَا بَنُونَ ﴿88﴾
जिस दिन न तो माल ही कुछ काम आएगा और न लड़के बाले
إِلَّا مَنْ أَتَى ٱللَّهَ بِقَلْبٍۢ سَلِيمٍۢ ﴿89﴾
मगर जो शख्स ख़ुदा के सामने (गुनाहों से) पाक दिल लिए हुए हाज़िर होगा (वह फायदे में रहेगा)
وَأُزْلِفَتِ ٱلْجَنَّةُ لِلْمُتَّقِينَ ﴿90﴾
और बेहश्त परहेज़ गारों के क़रीब कर दी जाएगी
وَبُرِّزَتِ ٱلْجَحِيمُ لِلْغَاوِينَ ﴿91﴾
और दोज़ख़ गुमराहों के सामने ज़ाहिर कर दी जाएगी
وَقِيلَ لَهُمْ أَيْنَ مَا كُنتُمْ تَعْبُدُونَ ﴿92﴾
और उन लोगों (अहले जहन्नुम) से पूछा जाएगा कि ख़ुदा को छोड़कर जिनकी तुम परसतिश करते थे (आज) वह कहाँ हैं
مِن دُونِ ٱللَّهِ هَلْ يَنصُرُونَكُمْ أَوْ يَنتَصِرُونَ ﴿93﴾
क्या वह तुम्हारी कुछ मदद कर सकते हैं या वह ख़ुद अपनी आप बाहम मदद कर सकते हैं
فَكُبْكِبُوا۟ فِيهَا هُمْ وَٱلْغَاوُۥنَ ﴿94﴾
फिर वह (माबूद) और गुमराह लोग और शैतान का लशकर
وَجُنُودُ إِبْلِيسَ أَجْمَعُونَ ﴿95﴾
(ग़रज़ सबके सब) जहन्नुम में औधें मुँह ढकेल दिए जाएँगे
قَالُوا۟ وَهُمْ فِيهَا يَخْتَصِمُونَ ﴿96﴾
और ये लोग जहन्नुम में बाहम झगड़ा करेंगे और अपने माबूद से कहेंगे
تَٱللَّهِ إِن كُنَّا لَفِى ضَلَـٰلٍۢ مُّبِينٍ ﴿97﴾
ख़ुदा की क़सम हम लोग तो यक़ीनन सरीही गुमराही में थे
إِذْ نُسَوِّيكُم بِرَبِّ ٱلْعَـٰلَمِينَ ﴿98﴾
कि हम तुम को सारे जहाँन के पालने वाले (ख़ुदा) के बराबर समझते रहे
وَمَآ أَضَلَّنَآ إِلَّا ٱلْمُجْرِمُونَ ﴿99﴾
और हमको बस (उन) गुनाहगारों ने (जो मुझसे पहले हुए) गुमराह किया
فَمَا لَنَا مِن شَـٰفِعِينَ ﴿100﴾
तो अब तो न कोई (साहब) मेरी सिफारिश करने वाले हैं
وَلَا صَدِيقٍ حَمِيمٍۢ ﴿101﴾
और न कोई दिलबन्द दोस्त हैं
فَلَوْ أَنَّ لَنَا كَرَّةًۭ فَنَكُونَ مِنَ ٱلْمُؤْمِنِينَ ﴿102﴾
तो काश हमें अब दुनिया में दोबारा जाने का मौक़ा मिलता तो हम (ज़रुर) ईमान वालों से होते
إِنَّ فِى ذَٰلِكَ لَـَٔايَةًۭ ۖ وَمَا كَانَ أَكْثَرُهُم مُّؤْمِنِينَ ﴿103﴾
इबराहीम के इस किस्से में भी यक़ीनन एक बड़ी इबरत है और इनमें से अक्सर ईमान लाने वाले थे भी नहीं
وَإِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ ٱلْعَزِيزُ ٱلرَّحِيمُ ﴿104﴾
और इसमे तो शक ही नहीं कि तुम्हारा परवरदिगार (सब पर) ग़ालिब और बड़ा मेहरबान है