क्या क़ुरआन में तब्दीली की गई है ?

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हिफ़ाज़त का वादा (15:9), लाखों ज़बानी हिफ़ाज़ों की सनद, इस्लाम की पहली सदी के मैनुस्क्रिप्ट, और मुकर्रर क़िराअत असल में क्या हैं।

नहीं : "निःसंदेह हमने ही यह ज़िक्र (क़ुरआन) उतारी है और निःसंदेह हम ही इसकी अवश्य रक्षा करने वाले हैं।" (क़ुरआन 15:9)। हिफ़ाज़त लाखों याददाश्तों से गुज़रती है : हर नस्ल में पूरा क़ुरआन ज़बानी रखने वाले मौजूद हैं जो नुसूस को लगातार दोहराते हैं, पैग़ंबर (उन पर अल्लाह की रहमत और सलामत हो) से लेकर आज तक। सबसे पुराने मैनुस्क्रिप्ट आज के नुसूस से मेल खाते हैं, और मुकर्रर क़िराअत पैग़ंबर (उन पर सलाम हो) से मरवी हुई उच्चारण हैं, अलग-अलग रूपांतरण नहीं।

18 अक्टूबर 2026 को 20h58 बजे अपडेट किया गया

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हिफ़ाज़त का वादा

क़ुरआन अपनी अपनी हिफ़ाज़त बयान करता है : "निःसंदेह हमने ही यह ज़िक्र (क़ुरआन) उतारी है और निःसंदेह हम ही इसकी अवश्य रक्षा करने वाले हैं।" (क़ुरआन 15:9)। वादा किताबों की तारीख़ के अनोखे तरीक़े से पूरा हुआ : जमा हुई याददाश्त।

नज़ूल के दिनों से हर आयत दर्जनों सहाबा की याददाश्त में थी ; आज उम्र की हर हद के लाखों मुसलमान 114 सूरतें ज़बानी जानते हैं, और ज़बानी रवायत की सनद हर रमज़ान की रात आम तौर पर जाँची जाती है।

जमा हुई याददाश्त : अनोखा तरीक़ा

जो नुसूस सिर्फ़ लिखे हुए मरवी हो, बिना गवाह बदला जा सकता है ; जो नुसूस हर नस्ल में सैकड़ों याददाश्तों से आम तौर पर पढ़ा जाए, वह फ़ौरन शोर के बिना नहीं बदल सकता।

पैग़ंबर (उन पर सलाम हो) हर रमज़ान में फ़रिश्ते जिबरील के साथ पूरा क़ुरआन पढ़ते थे, और मुकम्ल तिलावत ज़िंदा इदारा बन गई : दाकार का बच्चा, जकार्ता का हाजी और पेरिस का इमाम एक ही हरूफ़ पढ़ते हैं। यही वह तारीख़ी ताला है जो किसी और मुक़द्दस किताब को नसीब नहीं हुआ।

पहली सदी के मैनुस्क्रिप्ट

आसार-ए-क़दीमा याददाश्त की गवाही देते हैं : बर्मिंघम के फ़ोलियो, जिन्हें ऑक्सफ़र्ड यूनिवर्सिटी ने ईसवी 568 से 645 के दरमियान कार्बन से नापा, आज के नुसूस से मेल खाते हैं। पुराने बड़े कोडेक्स (तोपकापी, समरक़ंद) वही क़िस्सा कहते हैं। इस्लामी तारीख़ की पहली सदी के मैनुस्क्रिप्ट, वही जिन्हें माहिरीन दशकों से छान रहे हैं, नुसूस का कोई ऐसा मुबद्दल रूप नहीं निकाल सके जो जाँच टिके।

मुकर्रर क़िराअत और उसमान की स्टैंडर्डाइज़ेशन

असली "फ़र्क़" क़िराअत हैं : 10 मुकर्रर तिलावतें, हर एक अपनी सनद के साथ पैग़ंबर (उन पर सलाम हो) तक पहुँचती हैं, ज़बर के फ़र्क़ जो किसी अकीदा तक नहीं जाते।

उसमान की स्टैंडर्डाइज़ेशन, बुख़ारी से मरवी, ने मक़्तूह सूबों के नए मुसलमानों के लिए सूबाई नक़लों की इमला मदीना के कोडेक्स पर इकहरा किया : एक ही नुसूस की इमलाई इकहराई, नई लिखावट नहीं। क्या क़ुरआन में विरोधाभास हैं ? का पृष्ठ अगला इल्ज़ाम जवाब देता है, और क्या क़ुरआन बाइबिल से लिया गया है ? का पृष्ठ मज़नून सरिक़त (चोरी) वाला।

बार-बार पूछे जाने वाले प्रश्न क़ुरआन की हिफ़ाज़त

क्या क़िराअत (तिलावतें) क़ुरआन के अलग-अलग रूपांतरण हैं ?

नहीं : वह पैग़ंबर (उन पर अल्लाह की रहमत और सलामत हो) से मरवी हुई मुकर्रर उच्चारण हैं, मानी हुई 10 की गिनती, जो ज़बर की आवाज़ों और कभी-कभी एक ही मतलब वाले लफ़्ज़ तक महदूद हैं। कोई अकीदा नहीं बदलती : वह दस्तावेज़ी हैं, अपनी सनदों से बयान की गईं, और 14 सदियों से बिना शोर के दुनिया भर की नमाज़ों में पढ़ी जा रही हैं।

क्या सना का मैनुस्क्रिप्ट तब्दीलियों की गवाही देता है ?

सना का पैलिम्पसेस्ट (दोबारा लिखा गया पुराना क़ालिन) ने पक्की अकादमिक नतीजों से ज़्यादा मीडिया वाली थीसिसें खिलाईं : बुनियादी नुसूस मुताबिक़ है, और ख़ास बातें दोबारा इस्तेमाल हुए क़ालिन की माद्दी तारीख़ में आती हैं। ज़बानी हिफ़ाज़त की सनद ज़िंदा है और रमज़ान की हर रात दुनिया की सब मस्जिदों में जाँची जा सकती है।

उसमान ने नक़लें जलाईं क्यों ?

उन्होंने सूबों को भेजी गई नक़लों की इमला मदीना के कोडेक्स पर मुकर्रर की, ताकि अरबी लहजों के तिलावती इख़्तिलाफ़ न रहें, और पुरानी नक़लें वापस लीं ताकि नए मुसलमानों की उलझन न रहे। नुसूस वही था : यह बुख़ारी से मरवी इमलाई इकहराई (एकरूपता) है, नई लिखावट नहीं।

स्रोत: क़ुरआन 15:9 (दिया गया हिफ़ाज़त वाला वादा) · इस्लाम की पहली सदी के मैनुस्क्रिप्ट (बर्मिंघम) · मानी हुई 10 मुकर्रर क़िराअत · बुख़ारी (उसमान की स्टैंडर्डाइज़ेशन)

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निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

पैग़ंबर पर दुरूद