होम > खंडन : इस्लाम पर लगाए गए इलज़ामों के जवाब > मुहम्मद ने सफ़िया से निकाह क्यों किया ?
इल्ज़ाम कहता है : अपने शौहर के क़त्ल की रात की क़ैदी। मरवी फ़ाइल कहती है : ख़ैबर की एक शरीफ़ यहूदी ख़ातून, चुनने के लिए आज़ाद, आज़ाद करके उससे निकाह किया गया, उस घूँघट के साथ जो उसे बीवी घोषित करता है ; और वह पहले निकाह की तरफ़ से क़दीम बीवी थी, जो क़ब का टूट चुका था।
सफ़िया बिनत हुयय, ख़ैबर की यहूदी बादशाहों की नस्ल से, पहले निकाह से बीवी रह चुकीं, ख़ैबर के बाद पैग़ंबर (उन पर अल्लाह की रहमत और सलामत हो) से निकाह हुआ : उन्होंने उन्हें आज़ाद किया, उनकी आज़ादी उनका महर ठहरी, और वह उन ख़ातूनों में से हुईं जिन पर घूँघट वाजिब ठहरा, आज़ाद बीवी की निशानी। सहीह मदीना के रास्ते में शादी की तफ़सील बयान करता है : 3 दिन, ख़ुरमा और पनीर का दस्तरख़्वान, और मुसलमानों का सवाल : बीवी हैं या क़ैदी ? पैग़ंबर (उन पर सलाम हो) ने उन पर घूँघट डाला : बीवी (बुख़ारी 4212 और 4213 से मरवी)।
18 अक्टूबर 2026 को 20h58 बजे अपडेट किया गया
📖 2 मिनट पढ़ने का समयबुख़ारी रिवायत करता है : पैग़ंबर (उन पर सलाम हो) ख़ैबर के रास्ते में सफ़िया बिनत हुयय के साथ 3 दिन ठहरे, निकाह मुकम्ल होने तक, और वह उन ख़ातूनों में से हुईं जिन पर घूँघट वाजिब ठहरा (बुख़ारी 4212 से मरवी)। अनस की तफ़सील वाली रिवायत शादी बयान करती है : न रोटी न गोश्त, ख़ुरमे, पनीर और मक्खन एक चमड़े पर बिछे, और मुसलमानों का सवाल : वह उम्महातुल-मुमिनीन में से हैं या क़ैदी ?
पैग़ंबर (उन पर सलाम हो) ने जवाब दिया : अगर उन पर घूँघट है तो वह उम्महातुल-मुमिनीन में से हैं, और उन्होंने उन पर घूँघट डाला (बुख़ारी 4213 से मरवी)। मरवी फ़ाइल सार्वजनिक निकाह बयान करती है, शादी, घूँघट और आज़ाद बीवी के मुक़ाम के साथ, रात की क़ैदी नहीं।
मरवी नियम : पैग़ंबर (उन पर सलाम हो) ने उन्हें आज़ाद किया, और उनकी आज़ादी उनका महर ठहरी : वह आज़ाद होकर निकाह में आईं, उस इनकार के हक़ के साथ जो आज़ाद की गई ख़ातून के पास होता है।
सफ़िया का पहला निकाह ख़ैबर से पहले ही टूट चुका था (वह किनाना बिन अल-रबी की बीवी थीं, और उससे पहले दूसरे एक नामवर की), और किनाना के क़त्ल का बयान करने वाले स्रोत इब्न इसहाक की सीरत से आते हैं, उन तफ़सीलों के साथ जिन्हें मुहद्दिसीन दलील नहीं गिनते : "अपने शौहर के क़त्ल की रात" वाला इल्ज़ाम अलग-अलग स्रोतों की चीज़ें इस घिनौनी तस्वीर को तराशने के लिए ढेर करता है जिसे सहीह नुसूस बयान नहीं करते।
अरब के यहूदियों के सबसे मज़बूत क़िले वाली क़बीले की बादशाहों की नस्ल की ख़ातून से, लड़ाई के तुरंत बाद, निकाह अमन का सार्वजनिक अमल था : पैग़ंबर (उन पर सलाम हो) का घराना मग़लूब शराफ़त से रिश्ता बाँधता है, और लड़ाई की शिकार ख़ातून उम्महातुल-मुमिनीन बनती है, पूरी उम्मत से इसी मुक़ाम पर इज़्ज़त पाती है।
उनकी मरवी बीवी वाली ज़िंदगी गवाही देती है : वह मदीना में दहाइयों साल रहीं, हदीसें रिवायत कीं, उनकी मौत पर मातम हुआ, उम्महातुल-मुमिनीन के मुक़ाम के साथ। पैग़ंबर की एक से अधिक पत्नियाँ क्यों थीं ? का पृष्ठ आम ढाँचा संभालता है, और इस्लाम में युद्ध-बंदियाँ क़ैदियों का मुक़ाम।
नहीं : बहस का क़िस्सा अलग-अलग बे-तारीख़ चीज़ों को जोड़ता है। सफ़िया पहले निकाह की बीवी थीं (किनाना, जिनका क़त्ल ख़ैबर के बाद ख़ज़ाने के मामले में हुआ सीरत के मुताबिक़, जिसकी तफ़सीलें इब्न इसहाक से आती हैं और बहस वाली हैं), और पैग़ंबर (उन पर सलाम हो) से निकाह सहीह में मरवी शरई मुद्दत (इद्दत) के पूरा होने के बाद हुआ : निकाह मुद्दत पूरी होने के बाद हुआ, मदीना के रास्ते में सार्वजनिक शादी के साथ। अकेली रात का कल्चर एक बहस की तराशी हुई तस्वीर है।
मरवी नुसूस उलटा बयान करते हैं : उनके सामने दो रास्ते थे, अपनी क़ौम में लौटना या निकाह में आना, और उनकी आज़ादी उन्हें इनकार का हक़ देती थी, महर आज़ादी के नियम से तय था। उनकी बाद की ज़िंदगी : वह इज़्ज़त वाली बीवी रहीं, उम्महातुल-मुमिनीन के मुक़ाम पर, और उनसे रिवायत करने वाले उन्हें दानिश और शराफ़त वाली बताते हैं। उन्हें रुलाने वाले क़िस्से देर के और बहस वाले स्रोतों से आते हैं।
इसलिए कि यही सबसे मज़बूत अमन की दावत थी : लड़ाई के बाद पैग़ंबर (उन पर सलाम हो) के घराने का ख़ैबर की यहूदी शराफ़त से रिश्ता, शहर की बादशाहों की नस्ल की ख़ातून को आज़ाद करके। क़ुरआन ने एहले-किताब की ख़ातूनों से निकाह की इजाज़त दी (क़ुरआन 5:5), और ख़ैबर की बाक़ी क़ैदियाँ रिहा या आज़ाद की गईं : पैग़ंबर (उन पर सलाम हो) की बीवी लोगों के सामने यह निशानी थी कि लड़ाई ख़त्म हो चुकी।