क्या मुसलमानों ने इस्कंदरिया की लाइब्रेरी जलाई ?

होम > खंडन : इस्लाम पर लगाए गए इलज़ामों के जवाब > क्या मुसलमानों ने इस्कंदरिया की लाइब्रेरी जलाई ?

इलज़ाम 13वीं सदी के इक तन्हा क़िस्से पर टिका है, वाक़िये से 600 साल बाद का। लाइब्रेरी की असली तबाहियाँ इस्लाम से पहले की दस्तावेज़ी हैं (सीज़र, 4वीं सदी के ईसाई), और इस्लामी क़िस्से को अक़्ल और मुसलमान उलमा ख़ुद चुनौती देते हैं।

नहीं : लाइब्रेरी की दस्तावेज़ी तबाहियाँ इस्लाम से पहले की हैं (ईसा से 48 साल पहले सीज़र की आग, 391 में ईसाइयों के हाथों सेरापियम की तबाही), और जनरल अम्र को इलज़ाम लगाने वाला क़िस्सा 13वीं सदी के इक ही देर के नुस पर टिका है, जिसे तारीख़नवीस ज़ाती नामुमकिनियों (चमड़े पर लिखी किताबों से 6 महीने ग़ुसलख़ाने गर्म) के लिए ठुकराते हैं और मुसलमान उलमा ख़ुद इनकार करते हैं, जिनके लिए क़दीम किताबें ख़तरा नहीं, ख़ज़ाना थीं।

18 अक्टूबर 2026 को 20h58 बजे अपडेट किया गया

📖 2 मिनट पढ़ने का समय

देर का क़िस्सा और उसकी नामुमकिनियाँ

इलज़ाम इब्ने अल-क़िफ़्ती (1248 में इंतक़ाल) के इक इबारत पर टिका है : जनरल अम्र ने ख़लीफ़ा उमर से किताबों का हुक्म पूछा, और ख़लीफ़ा ने फ़रमाया कि अगर उनका मज़मून क़ुरआन से मवाफ़िक़ है (बेकार) या मुख़ालिफ़ (ज़हरीला) तो जला दो, इसी से 6 महीने ग़ुसलख़ाने गर्म। तारीख़नवीस इस क़िस्से को दारख़िली और बैरूनी वजहों से ठुकराते हैं : मज़हबी तौर पर, रोलों से 6 महीने गर्म होते ग़ुसलख़ाने किसी सुलगन की हक़ीक़त से नहीं मिलते ;

तन्हा सरचश्मा होने के नाते यह उन बड़े इस्लामी तारीख़नवीसों में मौजूद नहीं जिन्होंने मिस्र की फ़तह पर लिखा ; और ख़लीफ़ा उमर, जिन्होंने कलेंडर जारी किया और उलमा की वज़ीफ़े तय किए, कहीं और इल्म का नाश करने वाले के तौर पर दस्तावेज़ी नहीं। इक तन्हा, देर का, नामुमकिन, अपने किरदार से मुख़ालिफ़ क़िस्सा : यह दस्तूर है, सरचश्मा नहीं।

असली तबाहियाँ, इस्लाम से पहले की

लाइब्रेरी की तारीख़ रोमन जंगों और 4वीं सदी के दीनी इख़्तिलाफ़ात की तारीख़ है : सीज़र के मुहासरे से जुड़ी आग (ईसा से 48 साल पहले) ने बंदरगाह के गोदामों के साथ मजमूआ का इक हिस्सा तबाह किया, और 391 में सेरापियम की तबाही, जो ईसाई मुअल्लिफ़ों ने ख़ुद दस्तावेज़ी की, ने क़दीम बुत-परस्त मजमूआ का जो बाक़ी था मिटा दिया।

जब 642 में मुसलमान फ़ौजें इस्कंदरिया में दाख़िल हुईं, बड़ी लाइब्रेरी ढाई सदी से मौजूद नहीं थी : फ़तह के मआसिर किसी क़दीम नुस में जलाने को कोई लाइब्रेरी नहीं मिलती।

इस्लामी तहज़ीब का दस्तावेज़ी सलूक

किताबों के बारे में इस्लामी तहज़ीब का असली सलूक क़रुन-ए-वुस्ता का सबसे दस्तावेज़ी सलूक है : बग़दाद के हिकमत के घर ने यूनानी तर्जुमों के लिए क़ीमती नुक़्तों का वज़न सोना दिया, कुरतुबा, क़ाहिरा और फ़ेज़ में सरेआम लाइब्रेरियाँ खुलीं, और अरस्तू, गैलन और बटलमियस की रचनाएँ ज़्यादातर अरबी नक़लों और तर्जुमों की बदौलत हम तक पहुँचीं, जिन्हें यूरोप बाद में दोबारा खोजेगा।

वह हदीस जो इल्म की तलाश को जन्नत की इक मंज़िल और क़रीब बनाती है (मुस्लिम से मरवा) और इस्लामी मजमूआ में तालीम का वाजिब, लाइब्रेरियों की तबाही को उस तहज़ीब से जो उन्होंने खड़ी की नामुमकिन बनाते हैं : हमलावरों से जलने वाली लाइब्रेरियाँ (1258 में बग़दाद में मंगोल) इस्लामी थीं, इस्लामी वालों से जली नहीं।

बार-बार पूछे जाने वाले प्रश्न इस्कंदरिया की लाइब्रेरी

जनरल अम्र और 6 महीने गर्म किए गए ग़ुसलख़ाने का क़िस्सा कहाँ से आया ?

इक ही नुस से, इब्ने अल-क़िफ़्ती (1248 में इंतक़ाल), मज़कूरा वाक़िये के क़रीब 6 सदियों बाद, बिना सिलसिला और बिना दर्शाई गई सरचश्मा, और उन बड़े इस्लामी तारीख़नवीसों की उलटी गवाही पर जिन्होंने उनसे कहीं पहले इस्कंदरिया पर लिखा। 6 महीने की मज़कूरा सुलगन मज़हबी तौर पर नामुमकिन है (ग़ुसलख़ाने का लिनन चमड़े पर लिखी किताबों से जलाया गया), और कोई संजीदा मादर तारीख़नवीस उसे गवाही नहीं गिनता।

लाइब्रेरी को असल में तबाह किसने किया ?

दस्तावेज़ी तबाहियाँ इस्लाम से पहले की हैं : सीज़र की जंग से जुड़ी आग (ईसा से 48 साल पहले), रोमन फ़सादात की लूट, फिर 391 में बादशाह थियोडोसियस के दौर में ईसाई हज़ज़ामों के हाथों सेरापियम और उसके बाक़ी मजमूआ की तबाही। जब 642 में मुसलमान इस्कंदरिया में दाख़िल हुए, बड़े मजमूआत की बाक़ी सिर्फ़ याददाश्त और हिस्से थे।

क्या मुसलमान किताबें जलाते थे ?

दस्तावेज़ी मामला उलटा कहता है : बग़दाद में क़रुन-ए-वुस्ता की सबसे बड़ी लाइब्रेरी थी (हिकमत का घर), कुरतुबा सैकड़ों हज़ार ज़िल्दों का दावा करती थी, और मुसलमान उलमा ने यूनानी, फ़ारसी और भारतीय अदब को कॉपी किया, तर्जुमा किया और महफ़ूज़ रखा, जो हम तक उन्हीं नक़लों से पहुँचा। जिस तहज़ीब ने अरस्तू को यूरोप तक पहुँचाया वह लाइब्रेरियाँ नहीं जलाती।

स्रोत: इस्लाम से पहले की दस्तावेज़ी तबाहियाँ (ईसा से 48 साल पहले, 391) · इब्ने अल-क़िफ़्ती का क़िस्सा (13वीं सदी, तन्हा और बहस-ख़ीज़ सरचश्मा) · मुसलमान उलमा का सलूक (लाइब्रेरियाँ, बग़दाद से कुरतुबा तक दस्तावेज़ी ख़ज़ाने) · इल्म की तलाश वाली हदीस (मुस्लिम से मरवा)

के लिए अन्य चरण खंडन : इस्लाम के ख़िलाफ़ इलज़ामों के जवाब

आगे पढ़ें इस्कंदरिया की लाइब्रेरी

بسم الله الرحمن الرحيم बुध 9 जुमादा अल-अव्वल
الأربعاء 9 جمادى الأولى
أحدب متزايد बढ़ता हुआ कूबड़ दिन 10.1 / 29.5
रोशनी 77%
5 दिनों में पूर्णिमा
لا حول ولا قوة إلا بالله अल्लाह के बिना कोई शक्ति और सामर्थ्य नहीं

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

पैग़ंबर पर दुरूद