होम > खंडन : इस्लाम पर लगाए गए इलज़ामों के जवाब > क्या क़ुरआन तालमूद और अपोक्रिफ़ा से लिया गया है ?
कुछ मुशतरका क़िस्से मौजूद हैं : क़ुरआन उन्हें पैग़ंबरी सिलसिले के तौर पर मानता है, जहाँ पुराने वर्ज़न इधर-उधर हो गए वहाँ उन्हें इस्लाह करता है, और नक़ल की थ्योरी न इस्लाहों को समझा पाती है न उस बयान को जिसे क़ुरआन लेने से इनकार करता है।
नहीं : क़ुरआन पुराने नुसूस से सिलसिला सार्वजनिक तौर पर मानता है : "आपसे वही कहा जा रहा है, जो आपसे पहले के रसूलों से कहा जा चुका है।" (क़ुरआन 41:43), और "यह (क़ुरआन) हरगिज़ ऐसी बात नहीं, जो गढ़ ली जाए। लेकिन इससे पहले की पुस्तकों की पुष्टि करने वाला और प्रत्येक वस्तु का विवरण (ब्योरा) है" (क़ुरआन 12:111)। मुशतरका क़िस्से मौजूद हैं, जहाँ पुराने वर्ज़न इधर-उधर हो गए वहाँ इस्लाह के साथ (आदम का गुनाह माफ़ी में बदला, दाऊद वाली ख़ता क़ुरआन में मौजूद नहीं), और नक़ल की थ्योरी न इस्लाहों को समझा पाती है न उस बयान को जिसे क़ुरआन लेने से इनकार करता है।
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18 अक्टूबर 2026 को 20h58 बजे अपडेट किया गया
📖 2 मिनट पढ़ने का समयक़ुरआन पुराने नुसूस से अपना रिश्ता नहीं छुपाता : वह उसे घोषित करता है। "आपसे वही कहा जा रहा है, जो आपसे पहले के रसूलों से कहा जा चुका है।" (क़ुरआन 41:43), और पैग़ंबरों के क़िस्सों के बारे में : "यह (क़ुरआन) हरगिज़ ऐसी बात नहीं, जो गढ़ ली जाए। लेकिन इससे पहले की पुस्तकों की पुष्टि करने वाला और प्रत्येक वस्तु का विवरण (ब्योरा) है" (क़ुरआन 12:111)।
छुपने वाला नक़लची असलियत बताता है ; मूसा और ईसा के साथ सिलसिले का दावा करने वाला पैग़ंबर एक ही इलान की गई इलाही तारीख़ का सिलसिला बताता है : यही नुसूस का बुनियादी उसूल है, नुसूस में ही एलान किया हुआ।
नक़ल की थ्योरी मुत्तासिल इख़्तिलाफ़ों पर ढह जाती है : तालमूद और ईसाई थ्योलॉजी आदम पर मौरूसी गिरावट लादते हैं, क़ुरआन एक आदम बयान करता है जिन्होंने ग़लती की, तौबा की और माफ़ी पाई : "दोनों ने कहा : ऐ हमारे पालनहार! हमने अपने आपपर अत्याचार किया है। और यदि तूने हमें क्षमा न किया तथा हमपर दया न की, तो निश्चय हम अवश्य घाटा उठाने वालों में से हो जाएँगे।" (क़ुरआन 7:23), उसके बाद क़बूली : "फिर आदम ने अपने पालनहार से कुछ शब्द सीख लिए, तो उसने उसकी तौबा क़बूल कर ली।" (क़ुरआन 2:37)।
दाऊद, जो बाइबिल क़िस्सों में एक भारी जुर्म लेते हैं, क़ुरआन में एक पैग़ंबर हैं जिनकी गिनी-चुनी ख़ता की माफ़ी हुई, उरिय्या के क़त्ल के बग़ैर। जो नक़लची हर इख़्तिलाफ़ पर मक़बूज़ नुसूस की थ्योलॉजी को सख़्त तौहीद की तरफ़ इस्लाह करे, वह मुसन्निफ़ है, उधार लेने वाला नहीं।
पुराने मुफ़स्सिरीन ने अपनी शरहों में यहूदी और ईसाई असल वाले क़िस्से मशकूर किए, और रिवायत ने उनके लिए एक नाम रखा हुआ क़िस्म गढ़ी : इसराईलिय्यात, तीन रुकन वाले नियम के तहत : वही से तस्दीक़ हो, लिया गया ; मुख़ालिफ़ हो, रद्द ; न्यूट्रल हो, बिना ज़मानत क़िस्से के तौर पर मरवी।
यह अपने मदनी मीरास की ख़बर रखने वाली एरुद का सलूक है : वह बताती है कि वह इंसानी गुफ़्तगू से क्या लेती है और जो वह अपनी वही से रखती है उसे अलग करती है। क़ुरआन ख़ुद दस्तावेज़ी सिलसिला एलान करता है : "तथा निःसंदेह यह निश्चित रूप से पहले लोगों की पुस्तकों में मौजूद है।" (क़ुरआन 26:196)। क्या क़ुरआन बाइबिल से लिया गया है ? का पृष्ठ नक़ल की आम फ़ाइल संभालता है।
माने हुए पैग़ंबरी सिलसिले से : क़ुरआन ख़ुद को उसी एक तारीख़ का इलान करता है जो पिछले पैग़ंबरों को बयान की गई, और वह यह ख़ुद एलान करता है (क़ुरआन 41:43)। पुरानी क़ौमों के क़िस्से ज़बानी चलते थे ; क़ुरआन उन्हें लेता है जब वे सच हों, इस्लाह करता है जब वे बिगड़े हों, और चुप रहता है जब वे कुछ न दें : तरीक़ा इस्लाह करने वाले का है, नक़लची का नहीं।
सबसे ज़्यादा मशहूर मिलान (मिट्टी का परिंदा, बोलने वाला पालना) उन क़िस्सों से आते हैं जिन्हें क़ुरआन तारीख़ देता और बदलता है : वह क़िस्से का दिल रखता है, उसकी थ्योलॉजी बदलता है (ईसा अल्लाह की इजाज़त से पैदा करते हैं, बच्चा माबूद नहीं), और अपोक्रिफ़ा की मसीही थ्योलॉजी कभी नहीं लेता। जो नक़ल हर इख़्तिलाफ़ पर उस चीज़ को इस्लाह करे जिसे वह नक़ल करने का दावा करती है, वह नक़ल नहीं : वह मानी हुई दोबारा लिखावट है।
क्योंकि यहूदी और ईसाई असल वाले मुसलमान बने लोग क़िस्से लाते थे (इसराईलिय्यात), और तफ़सीर के आलिम ने उन्हें छानने का तरीक़ा गढ़ा : जो क़ुरआन या सुन्नत से तस्दीक़ हो वह लिया गया, जो उनके मुख़ालिफ़ हो वह रद्द, बाक़ी बिना ज़मानत क़िस्से के तौर पर मरवी। यह 12 सदियों से रिकॉर्ड वाले फ़न का काम है : रिवायत ने हमेशा अपनी वही को अपने मदनी मीरास से अलग जाना।